critique an article University ofWollongong inDubai critical thinking tutorials Madeira School learning to write essays Bodwell High School write a fake newspaper article American International School-Salzburg articles about service Aiglon College how to write an entrance essay for college Leysin American School how to write an effective argumentative essay Limkokwing University good words for essay writing The Fessenden School importance of essay writing Admiral Farragut Academy online essay writing jobs d'Overbroeck's College www.coursework University ofGroningen (Study Group) pay to write essay Queen Margaret's School write essay climate change Bromsgrove International School Thailand

Go to Bing homepage
Go to Bing homepage

www.motherearthnews.com
Unconventional Gardening Methods: Pros and Cons - Organic ...
550 x 309 jpeg 46kB
www.orlandosentinel.com
Kate Jacobson - Orlando Sentinel
2048 x 1375 jpeg 431kB
tshaonline.org
HOUSTON OILERS | The Handbook of Texas Online| Texas State ...
920 x 610 jpeg 60kB
www.businessinsider.com
Eastern Washington Has The Ugliest Field In College ...
1196 x 672 jpeg 163kB
www.dailymail.co.uk
Adelaide library named one of the most beautiful in the ...
634 x 422 jpeg 124kB
extension.wsu.edu
Hugelkultur | Clallam County | Washington State University
4320 x 2432 jpeg 4868kB
www.express.co.uk
BLACK DEATH killer disease 'lurks in SOIL waiting to ...
590 x 350 jpeg 39kB
www.dailymail.co.uk
Arachnophobia evolved from cavemen when spiders were much ...
634 x 423 jpeg 36kB
www.seattleu.edu
Lushootseed and Coast Salish Culture - Taqwsheblu Vi ...
2961 x 3801 jpeg 3918kB
www.dailymail.co.uk
Is cartoon comparing Michelle Obama to Marie Antoinette ...
306 x 423 jpeg 53kB
uk.businessinsider.com
Road fatality percentage map - Business Insider
1200 x 970 png 283kB
usctkd.wordpress.com
USC Taekwondo Club | Fight On!
256 x 256 png 38kB
www.tourist-destinations.com
Virginia Beach, VA, - USA East Coast Tourist Attraction ...
1024 x 768 jpeg 113kB
www.wupr.org
20090113 Oil well plug | Washington University Political ...
3488 x 3593 jpeg 814kB
jokeindex.com
Tom Brady Deflategate Jokes
547 x 734 jpeg 130kB
www.wupr.org
The Oppressed Muslim Woman | Washington University ...
1289 x 607 jpeg 275kB
thejointblog.com
North Dakota Governor Signs Bill Legalizing Industrial ...
1024 x 685 jpeg 91kB
www.ezlandlordforms.com
Notice to Tenant to Repair Damages | EZ Landlord Forms
750 x 970 png 63kB
Feedback

articles Washington State University (INTO)

भारत में नारियों को हर दृष्टि से पूज्य शक्तिस्वरूपा माना जाता रहा है । इतिहास के कुछ अंधकारमय कालखण्ड को छोड्‌कर सदा ही नारी के शिक्षा एवं संस्कार को महत्व प्रदान किया गया । मुसलमानी सभ्यता के बीच परदे की प्रथा के कारण नारीशिक्षा भारत में लुप्तप्राय हो गई । केवल अपवाद रूप से समृद्ध मुसलमान परिवार की महिलाएँ ही घर पर शिक्षा ग्रहण करती थीं । इन में नूरजहाँ, जहाँआरा तथा जेबुन्निसा के नाम प्रसिद्ध हैं । हिंदुओं में बालविवाह, सती की प्रथा इत्यादि कारणों से बहुसंख्यक नारियाँ शिक्षा से वंचित रहीं । भारत में १९वीं शताब्दी में प्राय: सभी शैक्षिक संस्थाएँ जनता में नेतृत्व करनेवाले व्यक्तियों द्वारा संचालित थीं । इनमें कुछ अँग्रेज व्यक्ति भी थे । इस समय राजा राममोहन राय ने बाल विवाह तथा सती की प्रथा को दूर करने का अथक परिश्रम किया । इन कुप्रथाओं के दूर होने से नारीशिक्षा को प्रोत्साहन मिला । ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने बंगाल में कई स्कूल लड़कियों की शिक्षा के लिए खोले । सन् १८८२ के भारतीय शिक्षा आयोग (हंटर कमीशन) के अनुसार भारत सरकार की ओर से शिक्षिका प्रशिक्षण का प्रबंध हुआ । आयोग ने नारीशिक्षा के संबंध में अनेक उत्साहवर्धक सुझाव प्रस्तुत किए किंतु धर्मपरिवर्तन का भय -रहने के कारण सुझाव अधिक कार्यान्वित न हो सके । १९वीं शताब्दी के अंत तक भारत में कुल १२ कॉलेज, ४६७ स्कूल तथा ५६२८ प्राइमरी स्कूल लड़कियों के लिए थे । संपूर्ण भारत में छात्राओं की संख्या ४,४४,४७० थी । शताब्दी के अंत तक शनै: शनै: नारियाँ उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर हो रही थीं किंतु उनमें सुसलमान छात्राओं का अभाव था । १९वीं शताब्दी में इंग्लैड, फ्रांस तथा जर्मनी में लड़कियों के लिए अनेक कॉलेज खुल चुके थे । इंग्लैड में लड़कियों को लड़कों के ही समान शिक्षा देने की चेष्टा की जा रही थी किंतु १९ वीं शताब्दी के अंत में इंग्लैड में यह योजना बनाई गई कि नारीशिक्षा की समस्त शाखाओं को पाठक्रम में स्थान दिया जाए । इसे किंग्स कॉलेज लंदन के एफ. How to write a newspaper article for school Grier School? डी. articles Washington State University (INTO)? मॉरिस तथा अन्य लोगों ने बहुत बढ़ावा दिया । २०वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षो में भारत में इस बात पर ध्यान दिया गया कि नारीशिक्षा -उनके समाजिक जीवन के लिए उपयोगी होनी चाहिए क्योंकि उस समय तक जहाँ तक लिखने पढ़ने का संबंध था, लड़का और लड़कियों की शिक्षा में कोई अंतर न था । उच्च शिक्षा की दृष्टि से सन् १९१६ महत्वपूर्ण है । इस समय दिल्ली में लेडी हार्डिग कॉलेज की स्थापना हुई तथा श्री डी.के. How to write a nursing essay University of Southampton? कर्वे ने भारतीय नारियों के लिए एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जिस में सब से अधिक धन बंबई प्रांत के एक व्यापारी से मिलने के कारण उसकी माँ के नाम से विश्वविद्यालय का नाम श्रीमती नाथी बाई थैकरसी वीमेन्स यूनिवर्सिटी हुआ । कर्वे जी ने इस बात का अनुभव किया कि नारी तथा पुरुष की शिक्षा उनके आदर्शो के अनूकुल होनी चाहिए । इसी समय से मुसलमान नारियों ने भी उच्च शिक्षा में पदार्पण किया । नारी की प्राविधिक शिक्षा में कला, कृषि, वाणिज्य आदि का भी समावेश हुआ और नारी की उच्च शिक्षा में प्रगति हुई । धन के अभाव में लड़कियों के लिए पृथक कॉलेज तो अधिक न खुल सके किन्तु राजनीतिक आन्दोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेने से नारी सहशिक्षा की और अग्रसर हुई । सन् १९२८ में एक अखिल भारतीय नारी सम्मेलन के द्वारा यह निर्णीत हुआ कि लड़कियों के लिए एक ऐसा विद्यालय खोला जाए जो पूर्ण रूप से भारतीय जीवन के आदर्शो के अनुकूल हो तथा उसका समस्त प्रबंध स्त्रियाँ स्वयं करें । अत: दिल्ली में ही लेडी अर्विन कालेज की स्थापना हुई जिसमें गृहविज्ञान तथा शिक्षिका प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दिया गया । सन् १९४६-४७ में प्राइमरी कक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालय तक की कक्षाओं मैं अध्ययन करने वाली छात्राओं की कुल संख्या ४१ हो गई । इनमें प्राविधिक एवं व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण करनेवाली छात्राएँ भी थीं । भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् यद्यपि नारी शिक्षा में पहले की अपेक्षा बहुत प्रगति हुई तथापि अन्य पाश्चात्य देशों की समानता वह न कर सकीं । इस समय से नारीशिक्षा में संगीत एवं नृत्य की विशेष प्रगति हुई । सन् १९४८-४९ के विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने नारीशिक्षा के संबंध में मत प्रकट करते हुए कहा कि नारी विचार तथा कार्यक्षेत्र में समानता प्रदर्शित कर चुकी है, अब उसे नारी आदर्शो के अनुकूल पृथक रूप से शिक्षा पर विचार करना चाहिए । उच्च स्तर की शिक्षा में गृहविज्ञान, गृह अर्थ शास्त्र, नर्सिग तथा ललित कलाओं का प्रशिक्षण अवश्यक है । इसके बाद आगे चलकर हाई स्कूल की कक्षाओं में गृहविज्ञान को अनिवार्य बना दिया गया तथा पृथक रूप से भी अनेक कला केंद्र लड़कियों की शिक्षा के लिए खोले गए । स्वतंत्रता के १० वर्ष पश्चात् छात्राओं की कुल संख्या ८७,६७,९१२ हो गई तथा नारी का प्रवेश शिक्षा के प्रत्येक क्षेत्र में होने लगा । १९ मई सन् १९५८ को नारीशिक्षा की समस्याओं पर विचार करने के लिए एक राष्ट्रीय समिति नियुक्त हुई जिसने इनकी समस्याओं पर बहुत गंभीरतापूर्वक विचार करने के पश्चात् नारी के लिए उपयुक्त व्यवसायों की सूची सरकार के संमुख रखी है यद्यपि इन सभी व्यवस्सायों में जाने योग्य वातावरण अभी नहीं बन सका है । उच्च शिक्षा पाने के पश्चात स्त्रियाँ अध्यापन, चिकित्सा कार्य (डाक्टरी) अथवा कार्यालयों में ही अधिकतर काम करती है । इंगलेंड, जर्मनी, अमरीका, जापान आदि पूँजीवादी राष्ट्रों में ही नहीं, वरन रूस, रूमानिया, यूगोस्लाविया आदि साम्यवादी राष्ट्रों में भी नारीशिक्षा भारत की अपेक्षा बहुत आगे बढ़ गई है । यद्यपि २०वीं शताब्दी के प्रारंभ में पाश्चात्य देशों में यह आशंका उत्पन्न हो गई थी कि पुराष की प्रतिस्पर्धा में नारी अपने विकास के क्षेत्र से हटकर पुरुषजीवन को अपना रही है जो उसके लिए उपयुक्त नहीं है, किंतु अब ये राष्ट्र भी नारी की विशेष शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं तथा शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उपयुक्त योग्यता प्राप्त कर वहाँ की नारी अपने सुशिक्षित राष्ट्रसमाज का निर्माण कर रही है।